Wednesday, January 11, 2012
Sunday, April 17, 2011
गुरु जी ज़रा संभल के
दिल्ली के गुरु जी (शिक्षक) भाजपा नेताओ के आरोपों-प्रत्यारोपों से बहुत गुस्साये नजर आ रहे है.जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले साहब जी का आरोप है कि यहाँ विद्यार्थी को नक़ल करवाकर अच्छा परिणाम बना दिया जा रहा है .जैसे कि विपक्ष में आरोप लगाने की अपनी आदत के चलते ही भाजपा नेताओ ने यह आरोप लगाया होगा क्योकि वह घेरना तो चाहते होगे सरकार लेकिन गुरु जी बेचारे बस यूँ ही लपेटे में आ गये होगे . परन्तु गुरु जी को यह महसूस हो रहा है कि उनकी कार्य शिक्षा को भाव नही दिया जा रहा है. दिल्ली के गुरु जी इस बात से खुश है कि वह दिल्ली में है नकल करने के आरोपों से ही फंद छूट गया अगर कहीं भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश में होते तो आरोपों का पुलिंदा लदा होता और इज्जत की धजिज्या गुब्बारे कि तरह उड़ाई जाती, प्राण से भी हाथ धोना पड़ता. कुछ जानकारों लोगो का कहना हो कि मध्य प्रदेश में विद्यार्थियों कि विंग (ए.बी.वी.पी.) शिक्षक गुरु पर दुश्मनों कि तरह टूटते है. वैसे ए.बी.वी.पी., बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद् नहीं है.
जिन्हें संघ परिवार का खुरापाती बच्चा बोला जाये और गुरु जी भी कोई ईसाई पादरी शिशु तो है नहीं कि बजरंज दल या विश्व हिन्दू परिषद वाले उस पर जय श्री राम का घोष कर आक्रमण कर दे. परन्तु मध्य प्रदेश में तो गुरुओ पर ए.बी.वी.पी. का अभय राज चलता है. वहां वह किसी को नही छोड़ते है. जैसे कि गुजरात या राजस्थान मे तो कुलपति व प्रोक्टर ही शिकार हुये परन्तु गुरु जी सुरक्षित रहे.
मध्य प्रदेश में गुरु जी इतने भाग्यवान नहीं होते है जो ए.बी.वी.पी. के आक्रामक भ्रकुतियो कि आंधी से बच पाते, पहले ए.बी.वी.पी. की मार खाते, और फिर अपनी इज्जत की गुब्बारे की तरह धज्जियाँ उडवाते, फिर भी संतोष नहीं होता तो प्राण भी गवाने पड़ते हैं. संघ परिवार की पाठशाला में गुरुओं की बहुत क़द्र की जाती है क्योकि वह संघ के गुरूजी है. किसी स्कूल या कालेज के गुरु नहीं है. अगर स्कूलों व कालेजो में पढ़ाने वाले गुरुओं का सम्मान करने लगेगे तो पढ़ाने गुरुओं की ठुकाई कैसे कर पायगे. यदि वे गुरुओं को इतना सम्मान करते है. तो वे न प्रोफ़ेसर सब्बरवाल और न प्रोफ़ेसर ठाकुर जैसे गुरुओं की ठुकाई करने को कैसे मिलती.फिर भी बेचारे गुरु जी अपने प्राण कैसे गवाते.
जिन्हें संघ परिवार का खुरापाती बच्चा बोला जाये और गुरु जी भी कोई ईसाई पादरी शिशु तो है नहीं कि बजरंज दल या विश्व हिन्दू परिषद वाले उस पर जय श्री राम का घोष कर आक्रमण कर दे. परन्तु मध्य प्रदेश में तो गुरुओ पर ए.बी.वी.पी. का अभय राज चलता है. वहां वह किसी को नही छोड़ते है. जैसे कि गुजरात या राजस्थान मे तो कुलपति व प्रोक्टर ही शिकार हुये परन्तु गुरु जी सुरक्षित रहे.
मध्य प्रदेश में गुरु जी इतने भाग्यवान नहीं होते है जो ए.बी.वी.पी. के आक्रामक भ्रकुतियो कि आंधी से बच पाते, पहले ए.बी.वी.पी. की मार खाते, और फिर अपनी इज्जत की गुब्बारे की तरह धज्जियाँ उडवाते, फिर भी संतोष नहीं होता तो प्राण भी गवाने पड़ते हैं. संघ परिवार की पाठशाला में गुरुओं की बहुत क़द्र की जाती है क्योकि वह संघ के गुरूजी है. किसी स्कूल या कालेज के गुरु नहीं है. अगर स्कूलों व कालेजो में पढ़ाने वाले गुरुओं का सम्मान करने लगेगे तो पढ़ाने गुरुओं की ठुकाई कैसे कर पायगे. यदि वे गुरुओं को इतना सम्मान करते है. तो वे न प्रोफ़ेसर सब्बरवाल और न प्रोफ़ेसर ठाकुर जैसे गुरुओं की ठुकाई करने को कैसे मिलती.फिर भी बेचारे गुरु जी अपने प्राण कैसे गवाते.
वैसे तो प्रोफ़ेसर सब्बरवाल वाली घटना से सीख ले लेना चाहिये. अब तो एकदम सचेत रहना चाहिए. कही ए.बी.वी.पी. की सेना न आ जाए. गुरु जी जरा सभल कर रहना अगर किसी गुरु जी पर आरोप लगाया जाये, तो चुपचाप स्वीकार कर ले झूठ ही सही शान्ति से अपना मुंह काला व थोड़ी-बहुत ठुकाई सहन कर लेना, समझ लेना कि ब्रन्दावन की होली का ही दिन है. अगर गाली-गलौज या दादागिरी करे तो उसे नजरंदाज करना ही उचित होगा गुरुओं को मेरी सलाह है कि गुरूजी जरा वानर सेना से सभल के.
Wednesday, February 9, 2011
के. मोहनन की म्रत्यु सरकार के मुंह पर तमाचा
(कम से कम अब तो अफ़जल और कसाब को फ़ांसी पर लटकाए सरकार)
नई दिल्ली। फ़रवरी 6, 2011 । 26/11 के हीरो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चाचा श्री के मोहनन की म्रत्यु ने एक वार फ़िर नेताओं के नैतिक पतन की पराकाष्ठा को उजागर करते हुए वर्तमान सरकार की देश विरोधी नीतियों की कलई खोल कर रख दी है। विश्व हिंदू परिषद दिल्ली के महा मत्री श्री सत्येन्द्र मोहन ने श्री मोहनन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सरकार द्वारा शहीद परिजनों के प्रति निष्ठुरता और आतंकवादियों के प्रति उदार रवैया अपनाए जाने के कारण ही श्री मोहनन को जान देने पर विवस किया। उन्होंने कहा कि एक शहीद के परिजन द्वारा लोकतंत्र के मंदिर के सामने आत्म-दाह करना सरकार के मुंह पर गहरा तमाचा है।
विहिप दिल्ली के मीडिया प्रमुख श्री विनोद बंसल ने बताया कि हम अनेक वार मांग कर चुके हैं कि किन्तु फ़िर भी अफ़जल और कसाब जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को सजा देने की बात तो दूर उनको सरकारी संरक्षण में पाला जा रहा है। इससे अधिक दु:ख दायी स्थिति एक शहीद परिवार के लिए और क्या हो सकती है कि एक तरफ़ तो शहीदों के प्रति निष्ठुरता और दूसरी तरफ़ जिन्होंने हमारे जबानों को मारा उनके प्रति संरक्षणवाद की नीति। श्री बंसल ने कहा कि अब सरकार को बताना ही होगा कि वह आखिर कब तक इस तरह शहीदों की शहादत के साथ खिलवाड़ करती रहेगी।
ज्ञातब्य रहे कि मुंबई पर आतंकवादी हमले के दौरान शहीद हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चाचा के. मोहनन (56) ने गुरुवार शाम विजय चौक पर नॉर्थ फाउंटेन के सामने स्थित लॉन में खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली थी जिससे शुक्रवार रात्रि को उनकी म्रृत्यु हो गई। उनके पास से मिली डायरी के लगभग दो दर्जन पन्ने उनके दिल का दर्द बयां कर गए। इन पन्नों में उन्होंने अपनी तकलीफ का जिक्र करने के साथ-साथ देश की राजनीति और कानून व्यवस्था पर भी कई सवाल उठाए थे। रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी के नाम लिखी एक चिट्ठी में उन्होंने देश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य का हवाला देते हुए साफ तौर से यह लिखा है कि वर्तमान में देश की राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है। इसकी वजह से देश का भी नैतिक पतन होता जा रहा है और लोगों का सरकार पर से भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने मुंबई हमले के शहीदों के प्रति सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए लिखा कि कसाब और उसके जैसे कई अन्य आतंकवादी अब भी खुले घूम रहे हैं और सरकार उनके प्रति उदार रवैया अपना रही है।
Wednesday, January 26, 2011
ब्लॉग की कार्यशाला दिनांक २६ जनवरी, २०११
आज हम भी हिंदी माँ की सेवा करने हेतु ब्लॉग लिखने की कार्यशाला अपने बन्धु सुमित प्रताप सिंह से ले रहे हैं
Friday, January 14, 2011
शोभना वेलफेयर सोसाइटी ने मनाया नया साल
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