Wednesday, February 9, 2011
के. मोहनन की म्रत्यु सरकार के मुंह पर तमाचा
(कम से कम अब तो अफ़जल और कसाब को फ़ांसी पर लटकाए सरकार)
नई दिल्ली। फ़रवरी 6, 2011 । 26/11 के हीरो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चाचा श्री के मोहनन की म्रत्यु ने एक वार फ़िर नेताओं के नैतिक पतन की पराकाष्ठा को उजागर करते हुए वर्तमान सरकार की देश विरोधी नीतियों की कलई खोल कर रख दी है। विश्व हिंदू परिषद दिल्ली के महा मत्री श्री सत्येन्द्र मोहन ने श्री मोहनन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सरकार द्वारा शहीद परिजनों के प्रति निष्ठुरता और आतंकवादियों के प्रति उदार रवैया अपनाए जाने के कारण ही श्री मोहनन को जान देने पर विवस किया। उन्होंने कहा कि एक शहीद के परिजन द्वारा लोकतंत्र के मंदिर के सामने आत्म-दाह करना सरकार के मुंह पर गहरा तमाचा है।
विहिप दिल्ली के मीडिया प्रमुख श्री विनोद बंसल ने बताया कि हम अनेक वार मांग कर चुके हैं कि किन्तु फ़िर भी अफ़जल और कसाब जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को सजा देने की बात तो दूर उनको सरकारी संरक्षण में पाला जा रहा है। इससे अधिक दु:ख दायी स्थिति एक शहीद परिवार के लिए और क्या हो सकती है कि एक तरफ़ तो शहीदों के प्रति निष्ठुरता और दूसरी तरफ़ जिन्होंने हमारे जबानों को मारा उनके प्रति संरक्षणवाद की नीति। श्री बंसल ने कहा कि अब सरकार को बताना ही होगा कि वह आखिर कब तक इस तरह शहीदों की शहादत के साथ खिलवाड़ करती रहेगी।
ज्ञातब्य रहे कि मुंबई पर आतंकवादी हमले के दौरान शहीद हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चाचा के. मोहनन (56) ने गुरुवार शाम विजय चौक पर नॉर्थ फाउंटेन के सामने स्थित लॉन में खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली थी जिससे शुक्रवार रात्रि को उनकी म्रृत्यु हो गई। उनके पास से मिली डायरी के लगभग दो दर्जन पन्ने उनके दिल का दर्द बयां कर गए। इन पन्नों में उन्होंने अपनी तकलीफ का जिक्र करने के साथ-साथ देश की राजनीति और कानून व्यवस्था पर भी कई सवाल उठाए थे। रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी के नाम लिखी एक चिट्ठी में उन्होंने देश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य का हवाला देते हुए साफ तौर से यह लिखा है कि वर्तमान में देश की राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है। इसकी वजह से देश का भी नैतिक पतन होता जा रहा है और लोगों का सरकार पर से भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने मुंबई हमले के शहीदों के प्रति सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए लिखा कि कसाब और उसके जैसे कई अन्य आतंकवादी अब भी खुले घूम रहे हैं और सरकार उनके प्रति उदार रवैया अपना रही है।
Wednesday, January 26, 2011
ब्लॉग की कार्यशाला दिनांक २६ जनवरी, २०११
आज हम भी हिंदी माँ की सेवा करने हेतु ब्लॉग लिखने की कार्यशाला अपने बन्धु सुमित प्रताप सिंह से ले रहे हैं
Friday, January 14, 2011
शोभना वेलफेयर सोसाइटी ने मनाया नया साल
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