दिल्ली के गुरु जी (शिक्षक) भाजपा नेताओ के आरोपों-प्रत्यारोपों से बहुत गुस्साये नजर आ रहे है.जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले साहब जी का आरोप है कि यहाँ विद्यार्थी को नक़ल करवाकर अच्छा परिणाम बना दिया जा रहा है .जैसे कि विपक्ष में आरोप लगाने की अपनी आदत के चलते ही भाजपा नेताओ ने यह आरोप लगाया होगा क्योकि वह घेरना तो चाहते होगे सरकार लेकिन गुरु जी बेचारे बस यूँ ही लपेटे में आ गये होगे . परन्तु गुरु जी को यह महसूस हो रहा है कि उनकी कार्य शिक्षा को भाव नही दिया जा रहा है. दिल्ली के गुरु जी इस बात से खुश है कि वह दिल्ली में है नकल करने के आरोपों से ही फंद छूट गया अगर कहीं भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश में होते तो आरोपों का पुलिंदा लदा होता और इज्जत की धजिज्या गुब्बारे कि तरह उड़ाई जाती, प्राण से भी हाथ धोना पड़ता. कुछ जानकारों लोगो का कहना हो कि मध्य प्रदेश में विद्यार्थियों कि विंग (ए.बी.वी.पी.) शिक्षक गुरु पर दुश्मनों कि तरह टूटते है. वैसे ए.बी.वी.पी., बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद् नहीं है.
जिन्हें संघ परिवार का खुरापाती बच्चा बोला जाये और गुरु जी भी कोई ईसाई पादरी शिशु तो है नहीं कि बजरंज दल या विश्व हिन्दू परिषद वाले उस पर जय श्री राम का घोष कर आक्रमण कर दे. परन्तु मध्य प्रदेश में तो गुरुओ पर ए.बी.वी.पी. का अभय राज चलता है. वहां वह किसी को नही छोड़ते है. जैसे कि गुजरात या राजस्थान मे तो कुलपति व प्रोक्टर ही शिकार हुये परन्तु गुरु जी सुरक्षित रहे.
मध्य प्रदेश में गुरु जी इतने भाग्यवान नहीं होते है जो ए.बी.वी.पी. के आक्रामक भ्रकुतियो कि आंधी से बच पाते, पहले ए.बी.वी.पी. की मार खाते, और फिर अपनी इज्जत की गुब्बारे की तरह धज्जियाँ उडवाते, फिर भी संतोष नहीं होता तो प्राण भी गवाने पड़ते हैं. संघ परिवार की पाठशाला में गुरुओं की बहुत क़द्र की जाती है क्योकि वह संघ के गुरूजी है. किसी स्कूल या कालेज के गुरु नहीं है. अगर स्कूलों व कालेजो में पढ़ाने वाले गुरुओं का सम्मान करने लगेगे तो पढ़ाने गुरुओं की ठुकाई कैसे कर पायगे. यदि वे गुरुओं को इतना सम्मान करते है. तो वे न प्रोफ़ेसर सब्बरवाल और न प्रोफ़ेसर ठाकुर जैसे गुरुओं की ठुकाई करने को कैसे मिलती.फिर भी बेचारे गुरु जी अपने प्राण कैसे गवाते.
जिन्हें संघ परिवार का खुरापाती बच्चा बोला जाये और गुरु जी भी कोई ईसाई पादरी शिशु तो है नहीं कि बजरंज दल या विश्व हिन्दू परिषद वाले उस पर जय श्री राम का घोष कर आक्रमण कर दे. परन्तु मध्य प्रदेश में तो गुरुओ पर ए.बी.वी.पी. का अभय राज चलता है. वहां वह किसी को नही छोड़ते है. जैसे कि गुजरात या राजस्थान मे तो कुलपति व प्रोक्टर ही शिकार हुये परन्तु गुरु जी सुरक्षित रहे.
मध्य प्रदेश में गुरु जी इतने भाग्यवान नहीं होते है जो ए.बी.वी.पी. के आक्रामक भ्रकुतियो कि आंधी से बच पाते, पहले ए.बी.वी.पी. की मार खाते, और फिर अपनी इज्जत की गुब्बारे की तरह धज्जियाँ उडवाते, फिर भी संतोष नहीं होता तो प्राण भी गवाने पड़ते हैं. संघ परिवार की पाठशाला में गुरुओं की बहुत क़द्र की जाती है क्योकि वह संघ के गुरूजी है. किसी स्कूल या कालेज के गुरु नहीं है. अगर स्कूलों व कालेजो में पढ़ाने वाले गुरुओं का सम्मान करने लगेगे तो पढ़ाने गुरुओं की ठुकाई कैसे कर पायगे. यदि वे गुरुओं को इतना सम्मान करते है. तो वे न प्रोफ़ेसर सब्बरवाल और न प्रोफ़ेसर ठाकुर जैसे गुरुओं की ठुकाई करने को कैसे मिलती.फिर भी बेचारे गुरु जी अपने प्राण कैसे गवाते.
वैसे तो प्रोफ़ेसर सब्बरवाल वाली घटना से सीख ले लेना चाहिये. अब तो एकदम सचेत रहना चाहिए. कही ए.बी.वी.पी. की सेना न आ जाए. गुरु जी जरा सभल कर रहना अगर किसी गुरु जी पर आरोप लगाया जाये, तो चुपचाप स्वीकार कर ले झूठ ही सही शान्ति से अपना मुंह काला व थोड़ी-बहुत ठुकाई सहन कर लेना, समझ लेना कि ब्रन्दावन की होली का ही दिन है. अगर गाली-गलौज या दादागिरी करे तो उसे नजरंदाज करना ही उचित होगा गुरुओं को मेरी सलाह है कि गुरूजी जरा वानर सेना से सभल के.