Sunday, November 18, 2012

बीमार लोकतंत्र के लिए कोई इलाज बताएगा

हिंदुस्तान में कुछ सालों पहले तक लोकतंत्र का युद्ध वैचारिक  धरातल पर लड़ा जाता है, जिसमें व्यक्तिगत दुश्मनी का कोई नाम नहीं होता है, परन्तु आज की राजनीति मे वैचारिकता धरातल पर कोसो दूर नहीं दिखाई पड़ ररही हैं |बस लोकतंत्र को व्यक्तिगत दुश्मनी मे बदला जा रहा है | एक समाज सेवी अन्ना हजारे के टीम के सदस्य रहे, अरविन्द केजरीवाल अब राजनीति की डगर पर चल पड़े, केजरीवाल ने इंडिया अगेंस्ट करप्सन ( आई. ए .सी .) संस्था के द्वारा भ्रष्टाचार मिटने का अभियान शुरू किया है| वह चुन चुनकर राजनीतिज्ञो को निशाना बना रहे हैं| बेशक केजरीवाल ने यह साबित करने का प्रयास किया हो, कि सभी राजनैतिक दलों में मिली भगत होती हैं, कहीँ तक तो जनता भी सही समझ रही है |भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी जंग आरोपों और प्रत्यारोपो में संलिप्त हो चुकी हैं और परिणाम् कुछ भी नहीं दिखाई देता हैं |अब तो भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का दावा करने वाली आई .ए. एस . की सदस्य अंजली दमानिया स्वयं भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं | दमानिया ने स्वयं को किसान बताकर जमीन खरीद ली, फिर उसी जमीन को भूमि प्रयोग में बदल कर एक भू – माफिया को बेच दिया |अब एक पूर्व आई. पी. एस. अधिकारी ने लवासा परियोजना को लेकर केन्द्रीय मंत्री शरद पवार को निशाना बनाया और केजरीवाल को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की | उसके शब्दों की गर्जना ही सुनाई दी ,लेकिन परिणाम कुछ  नजर नहीं आया | बस एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के लिए दस्तावेज उपलब्ध करा रहे हैं| सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ मे मीडिया से कहा, कि केजरीवाल और उनकी संस्था को भाव नहीं देना चाहिए  और उसे अनसुना कर दिया जाना ही बेहतर होगा, क्योंकि वे कई नेताओं के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं| भ्रष्टाचार का आरोप लगाना साधारण हैं, लेकिन आरोप को सिद्ध करना बहुत कठिन है|आरोपों की तह तक जाना व छानबीन करना अति आवश्यक है| ताकि यह प्रमाणित किया जा सके, कि लगाये आरोप सत्य  हैं या असत्य | हालाँकि यह मुलायम सिंह का अपना विचार है |
आज कि स्थिति को देखते हुए भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिये कोई सटीक इलाज नहीं दिखाई देता है| एक बुद्धजीवी ने कहा है, " डॉक्टर तीन प्रकार के होते हैं - प्रथम श्रेणी  का डॉक्टर वह है, जो मरीज को देखेगा , नब्ज पहचानेगा , शांतिपूर्वक दवाई की पर्ची लिखकर फीस ले लेगा और चला जायेगा | मरीज दवा ले या ना ले उसे इससे कोई मतलब नही , दूसरी श्रेणी का डाक्टर वह है, जो मरीज को देखेगा,दवा दिलाएगा और परहेज बताएगा लेकिन उसे उस पर अमल करवाने के लिए बाध्य नहीं करेगा | उत्तम व तृतीय श्रेणी का डाक्टर वह होता है, जो मरीज को बैड पर लिटाकर उसके छाती पर घुटनों को रखकर उसकी नाक को बंदकर अपने हाथो से उसके कंठ मे दवाई पिलाएगा और कहेगा कि मै देखता हूँ कैसे नहीं ठीक होता हैं मै तुझे ठीक करके ही रहूँगा |
आज हमारे समाज मे भ्रष्टाचार के डॉक्टर तो बहुत आए, लेकिन इलाज किसी के पास नहीं,सभी डाक्टर भ्रष्टाचार की बीमारी को खत्म करने के लिए घपले - घोटालों को पर्दाफाश करने मे लगे हैं | इस लोकतंत्र को भ्रष्टाचार की बीमारी को जड़ से समाप्त करने की अचूक दवा चाहिए |
पंडित नेहरू के समय एक सोशलिस्ट पार्टी से आचार्य जे.पी . कृपलानी प्रजापति थे, जो संसद मे नेहरू जी की नीतियों की धज्जियां उडाया करते थे| जबकि उनकी पत्नी सुचेता कृपलानी कांग्रेस में थी|जो नेहरू जी की नीतियों की समर्थक थी. उस समय लड़ाई विचारों की होती है| सोशलिस्ट राम मनोहर लोहिया काँग्रेस के धुर आलोचक थे, तो क्या वह संसद के केन्द्रीय सभागर मे नेहरू के साथ बैठकर चाय नहीं पीते थे, वामपंथी नेताओ ने कभी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से अशब्द नहीं कहा | राजनीति अपनी जगह होती है और व्यक्तिगत मित्रता व शत्रुता अपनी जगह होती है|हमारे देश के सोशलिस्ट व नेता उदंड से उदंड विद्यार्थी को कुशल व श्रृद्धावान बनने की दवा नहीं बता पाते, बस उसकीउदंडता को प्रचारित करते हैं|
मै मानता हूँ कि कोई भी सिस्टम अच्छा और बुरा नहीं होता हैं, बल्कि उसे हम ही तो अच्छा और बुरा बनाते हैं |अगर आप सभी देश की १९५२ और १९५७ की संसद पर नजर डालें तो उस समय संसद के दोनों सदनों में राष्ट्र के सर्वश्रेष्ठ बुद्धजीवियो की कमी नहीं थी | वे लोग केवल संसद ही नहीं थे बल्कि देश के उच्च पदों पर आसीन रहे अधिकारी थे | अगर आज के संसद उनके विचारों का अध्यन कर और सुधार करे, तो कुछ हो सकता हैं| आज हमारे देश की राजनीति एक व्यापर बन चुकी है | हे देश के राष्ट्रभक्तो! भारत देश को भ्रष्टाचार की बीमारी से बचाने के कोई न कोई सटीक इलाज तो खोजना ही होगा|  जय हिंद! जय भारत!

लेखक- सुनील भदौरिया


संपर्क - नई दिल्ली, भारत
दूरभाष - 09868617879 

Sunday, April 17, 2011

गुरु जी ज़रा संभल के


दिल्ली के गुरु जी (शिक्षक) भाजपा नेताओ के आरोपों-प्रत्यारोपों से बहुत गुस्साये नजर आ रहे है.जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले साहब जी का आरोप है कि यहाँ विद्यार्थी को नक़ल करवाकर अच्छा परिणाम बना दिया जा रहा है .जैसे कि विपक्ष में आरोप लगाने की अपनी आदत के चलते ही भाजपा नेताओ ने यह आरोप लगाया होगा क्योकि वह घेरना तो चाहते होगे सरकार लेकिन गुरु जी बेचारे बस यूँ  ही लपेटे में आ गये होगे . परन्तु  गुरु जी को यह महसूस हो रहा है कि उनकी कार्य शिक्षा को भाव नही दिया जा रहा है.  दिल्ली के गुरु जी इस बात से खुश है कि वह दिल्ली में है नकल करने के आरोपों से ही फंद छूट गया अगर कहीं भाजपा शासित राज्य  मध्य  प्रदेश में होते तो आरोपों का पुलिंदा लदा होता और इज्जत की धजिज्या गुब्बारे कि तरह उड़ाई जाती, प्राण से भी हाथ धोना पड़ता. कुछ जानकारों  लोगो का कहना हो कि  मध्य प्रदेश में विद्यार्थियों कि विंग (ए.बी.वी.पी.) शिक्षक गुरु पर दुश्मनों कि तरह टूटते है. वैसे ए.बी.वी.पी., बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद् नहीं है.
जिन्हें संघ परिवार का खुरापाती बच्चा बोला जाये और गुरु जी भी कोई  ईसाई पादरी शिशु तो है नहीं कि  बजरंज दल या विश्व हिन्दू परिषद वाले उस पर जय श्री राम का घोष कर आक्रमण कर दे. परन्तु मध्य प्रदेश में तो गुरुओ पर  ए.बी.वी.पी. का अभय राज चलता है. वहां वह किसी को नही  छोड़ते है. जैसे कि गुजरात या राजस्थान मे तो कुलपति व प्रोक्टर ही शिकार हुये परन्तु गुरु जी सुरक्षित रहे.
मध्य प्रदेश में गुरु जी इतने भाग्यवान नहीं होते है जो
ए.बी.वी.पी.  के आक्रामक भ्रकुतियो कि आंधी से बच पाते, पहले ए.बी.वी.पी. की मार खाते, और फिर अपनी इज्जत की गुब्बारे की तरह धज्जियाँ उडवाते, फिर भी संतोष नहीं होता तो प्राण भी गवाने  पड़ते हैं. संघ परिवार की पाठशाला में गुरुओं  की बहुत क़द्र की जाती है क्योकि वह संघ के गुरूजी है. किसी स्कूल या कालेज के गुरु नहीं है. अगर स्कूलों व कालेजो में पढ़ाने वाले गुरुओं का सम्मान करने लगेगे तो पढ़ाने गुरुओं की ठुकाई कैसे कर पायगे. यदि वे गुरुओं को इतना सम्मान करते है. तो वे न प्रोफ़ेसर सब्बरवाल और न प्रोफ़ेसर ठाकुर जैसे गुरुओं की ठुकाई करने को कैसे मिलती.फिर भी बेचारे गुरु जी अपने प्राण कैसे गवाते.
वैसे तो प्रोफ़ेसर सब्बरवाल वाली घटना से सीख ले लेना चाहिये. अब तो एकदम सचेत रहना चाहिए. कही  ए.बी.वी.पी. की सेना  न आ जाए. गुरु जी जरा सभल कर रहना अगर किसी गुरु जी पर आरोप लगाया जाये, तो चुपचाप स्वीकार कर ले झूठ ही सही शान्ति से अपना मुंह काला व थोड़ी-बहुत ठुकाई सहन कर लेना, समझ लेना कि ब्रन्दावन की  होली का ही  दिन है. अगर गाली-गलौज या दादागिरी करे तो उसे नजरंदाज करना ही उचित होगा  गुरुओं को मेरी सलाह है कि गुरूजी जरा वानर सेना से सभल के.

Wednesday, February 9, 2011

थाईलैंड की कुछ झलकियां





के. मोहनन की म्रत्यु सरकार के मुंह पर तमाचा


(कम से कम अब तो अफ़जल और कसाब को फ़ांसी पर लटकाए सरकार)
नई दिल्ली। फ़रवरी 6, 2011 । 26/11 के हीरो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चाचा श्री के मोहनन की म्रत्यु ने एक वार फ़िर नेताओं के नैतिक पतन की पराकाष्ठा को उजागर करते हुए वर्तमान सरकार की देश विरोधी नीतियों की कलई खोल कर रख दी है। विश्व हिंदू परिषद दिल्ली के महा मत्री श्री सत्येन्द्र मोहन ने श्री मोहनन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सरकार द्वारा शहीद परिजनों के प्रति निष्ठुरता और आतंकवादियों के प्रति उदार रवैया अपनाए जाने के कारण ही श्री मोहनन को जान देने पर विवस किया। उन्होंने कहा कि एक शहीद के परिजन द्वारा लोकतंत्र के मंदिर के सामने आत्म-दाह करना सरकार के मुंह पर गहरा तमाचा है।
विहिप दिल्ली के मीडिया प्रमुख श्री विनोद बंसल ने बताया कि हम अनेक वार मांग कर चुके हैं कि किन्तु फ़िर भी अफ़जल और कसाब जैसे दुर्दांत आतंकवादियों को सजा देने की बात तो दूर उनको सरकारी संरक्षण में पाला जा रहा है। इससे अधिक दु:ख दायी स्थिति एक शहीद परिवार के लिए और क्या हो सकती है कि एक तरफ़ तो शहीदों के प्रति निष्ठुरता और दूसरी तरफ़ जिन्होंने हमारे जबानों को मारा उनके प्रति संरक्षणवाद की नीति। श्री बंसल ने कहा कि अब सरकार को बताना ही होगा कि वह आखिर कब तक इस तरह शहीदों की शहादत के साथ खिलवाड़ करती रहेगी।
ज्ञातब्य रहे कि मुंबई पर आतंकवादी हमले के दौरान शहीद हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के चाचा के. मोहनन (56) ने गुरुवार शाम विजय चौक पर नॉर्थ फाउंटेन के सामने स्थित लॉन में खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली थी जिससे शुक्रवार रात्रि को उनकी म्रृत्यु हो गई। उनके पास से मिली डायरी के लगभग दो दर्जन पन्ने उनके दिल का दर्द बयां कर गए। इन पन्नों में उन्होंने अपनी तकलीफ का जिक्र करने के साथ-साथ देश की राजनीति और कानून व्यवस्था पर भी कई सवाल उठाए थे। रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी के नाम लिखी एक चिट्ठी में उन्होंने देश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य का हवाला देते हुए साफ तौर से यह लिखा है कि वर्तमान में देश की राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है। इसकी वजह से देश का भी नैतिक पतन होता जा रहा है और लोगों का सरकार पर से भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने मुंबई हमले के शहीदों के प्रति सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए लिखा कि कसाब और उसके जैसे कई अन्य आतंकवादी अब भी खुले घूम रहे हैं और सरकार उनके प्रति उदार रवैया अपना रही है।

Wednesday, January 26, 2011

ब्लॉग की कार्यशाला दिनांक २६ जनवरी, २०११

आज हम भी हिंदी माँ की सेवा करने हेतु ब्लॉग लिखने की कार्यशाला अपने बन्धु सुमित प्रताप सिंह से ले रहे हैं

Friday, January 14, 2011

शोभना वेलफेयर सोसाइटी ने मनाया नया साल


शोभना वेलफेयर सोसाइटी ने थाना डिफेन्स कालोनी, नई दिल्ली के निकट स्थित इंदिरा कैम्प झुग्गी बस्ती में नये साल के उपलक्ष में एक कार्यक्रम का आयोजन किया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य था बच्चों में जागरूकता लाना व उनमें आत्मविश्वास  विकसित करना.इस कार्यक्रम के संचालन की कमान संभाली दिल्ली पुलिस के हास्य कवि श्री सुमित प्रताप सिंह ने. प्रत्येक बच्चे को सर्वप्रथम अपना पूरा परिचय देना था उसके बाद सामान्य जागरूकता से सम्बंधित कुछ प्रश्नों के उत्तर देने थे तथा अंत में कोई भी एक कविता सुनानी थी. इस प्रकार कुल पांच आत्मविश्वासी बच्चों का चयन किया गया व उन्हें विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया. ये आत्मविश्वासी बच्चे थे:- 1. नीलम, 2. अभिषेक, 3. पूनम, 4. उमित व 5. आकाश. कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रत्येक बच्चे को स्टेशनरी व रिफ्रेशमेंट प्रदान की गयी. बच्चों व वहाँ उपस्थित उनके माता-पिता के मनोरंजन हेतु कवि सुमित प्रताप सिंह ने कविता पाठ किया व सभी का मन मोह लिया. उनकी रचना नव वर्ष पर आओ मिल विचारें कुछ नया, बीते की चिंता क्यों जो गया सो गया विशेष रूप से पसंद की गयी. सोसाइटी की अध्यक्षा व वहाँ उपस्थित श्रीमती मथुरा देवी, सुश्री सीमा कुमारी, श्री दिनेश चौहान  व सुश्री वनिता सिंह आदि सोसाइटी के सदस्यों ने सभी बच्चों को नये साल 2011की शुभकामनाएं दीं व ऐसे ही आत्मविश्वास के साथ निरंतर आगे बढ़ने को प्रेरित किया.